भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ शुरू, 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और वैश्विक टेक दिग्गज शामिल

नई दिल्ली: नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की शुरुआत हो गई है। 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस वैश्विक सम्मेलन में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और लगभग 500 वैश्विक एआई विशेषज्ञ व उद्योग जगत के नेता भाग ले रहे हैं।

यह पहली बार आयोजित किया जा रहा वैश्विक स्तर का एआई सम्मेलन है, जिसमें भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य, नीतियों और निवेश पर वैश्विक संवाद का नेतृत्व कर रहा है।

तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित समिट

समिट को तीन प्रमुख स्तंभों या ‘सूत्रों’— People, Planet और Progress — पर आधारित किया गया है। इसके साथ आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो में 30 देशों के 300 से अधिक प्रदर्शक और 10 से ज्यादा थीम आधारित पवेलियन शामिल होने की उम्मीद है।

वैश्विक टेक कंपनियों की भागीदारी

सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं, जिनमें Sam Altman (ओपनएआई), Sundar Pichai (अल्फाबेट/गूगल), Dario Amodei (एंथ्रोपिक) और Demis Hassabis (गूगल डीपमाइंड) शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, एनविडिया के सीईओ Jensen Huang का कार्यक्रम अंतिम समय में स्थगित हो गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत युवा और तकनीक-प्रेमी उपभोक्ताओं के बड़े बाजार तथा विशाल प्रतिभा पूल के कारण एआई कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।

भारत का टेक हब बनने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार पिछले कुछ वर्षों से भारत को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में अरबों डॉलर के निवेश, विनिर्माण को बढ़ावा देने और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि सरकार की नीतियां बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में अपने संचालन स्थापित और विस्तारित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, उपयोगकर्ता और प्रतिभा पर फोकस

समिट में एआई से जुड़े तीन प्रमुख क्षेत्रों— इंफ्रास्ट्रक्चर, उपयोगकर्ता आधार और प्रतिभा — पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • एआई डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने से जुड़े निवेश समझौतों की घोषणाएं संभव हैं।
  • भारत दुनिया के सबसे बड़े एआई उपयोगकर्ता बाजारों में तेजी से उभर रहा है।
  • वैश्विक कंपनियां भारत को एआई प्रतिभा का प्रमुख स्रोत मान रही हैं, जहां बड़ी संख्या में इंजीनियर, डेटा वैज्ञानिक और उत्पाद विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में स्थापित 60% से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) एआई, डेटा और डिजिटल इंजीनियरिंग पर केंद्रित हैं, और आने वाले महीनों में इस प्रवृत्ति के और तेज होने की संभावना है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सम्मेलन के दौरान भारत निवेश और साझेदारी के नए अवसरों को प्रस्तुत करेगा, जिससे देश की एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति मिलने की उम्मीद है।