पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर एक्साइज घटा, OMCs को राहत देने का फैसला

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAID) में ₹10 प्रति लीटर की कटौती कर दी है।

सरकार के 26 मार्च को जारी आदेश के अनुसार, पेट्रोल पर SAID घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। इस कदम का उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करना है।

आम उपभोक्ताओं को तुरंत राहत नहीं

हालांकि, इस कटौती का सीधा असर फिलहाल आम उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं पड़ेगा। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत कमी नहीं की जाएगी। सरकार का यह कदम मुख्य रूप से OMCs को टैक्स बोझ से राहत देने के लिए उठाया गया है, ताकि वे बढ़ती लागत के बावजूद ईंधन की कीमतें स्थिर रख सकें।

सरकार ने राजस्व में बड़ी कटौती स्वीकार की

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार ने टैक्स राजस्व में बड़ी कटौती करते हुए यह निर्णय लिया है, ताकि तेल कंपनियों के भारी नुकसान को कम किया जा सके।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के चलते कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

निर्यात पर भी लगाया गया टैक्स

सरकार ने घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर भी टैक्स लगाया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार:

  • डीजल निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर टैक्स
  • एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर टैक्स

वैश्विक हालात का असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान में युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है और हाल ही में यह $107 प्रति बैरल के पार पहुंच गई।

निजी कंपनियों ने बढ़ाए दाम

जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां फिलहाल कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं, वहीं निजी कंपनियां लागत बढ़ने का असर उपभोक्ताओं पर डालने लगी हैं।
निजी रिफाइनर नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम ₹3 और डीजल के दाम ₹5 प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने इसे उद्योग में “अभूतपूर्व चुनौतियों” का परिणाम बताया है।

लॉकडाउन की अफवाहों का खंडन

इस बीच, सरकार ने देश में किसी संभावित लॉकडाउन की अफवाहों को भी खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और सरकार संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है—एक ओर कंपनियों को राहत देना और दूसरी ओर उपभोक्ताओं पर बोझ सीमित रखना।