पिछले 10 वर्षों में मौजूदा जजों के खिलाफ 8,360 शिकायतें: लोकसभा में कानून मंत्रालय

caa in supreme court

केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि पिछले दस वर्षों में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को उच्च न्यायपालिका के मौजूदा न्यायाधीशों के खिलाफ 8,360 शिकायतें प्राप्त हुईं। हालांकि, इन शिकायतों पर की गई कार्रवाई या उनके रिकॉर्ड के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।

यह जानकारी लोकसभा में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद वी.एस. मथेस्वरन द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई।

राज्य मंत्री (कानून एवं न्याय) अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2016 से 2025 के बीच ये शिकायतें दर्ज की गईं।

शिकायतों की प्रकृति पर सवाल

सांसद ने यह भी पूछा था कि क्या भ्रष्टाचार, यौन दुराचार या अन्य गंभीर कदाचार से संबंधित शिकायतों की सूची उपलब्ध है और उन पर क्या कार्रवाई की गई। मंत्रालय के उत्तर में कार्रवाई से संबंधित जानकारी नहीं दी गई और यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि शिकायतों पर कार्रवाई का रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं है।

शिकायतों की प्रक्रिया

सरकार ने अपने जवाब में कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त करने के लिए “इन-हाउस प्रक्रिया” लागू है, जिसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश शिकायतें प्राप्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी होते हैं।

साथ ही, Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS) या अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों को मुख्य न्यायाधीश या संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया जाता है।

निगरानी और जवाबदेही पर स्पष्टता नहीं

सांसद ने यह भी पूछा था कि क्या सरकार उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ शिकायतों के व्यवस्थित रिकॉर्ड, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी करने या अन्य कदम उठाने पर विचार कर रही है। इस प्रश्न पर भी मंत्रालय ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

मामले ने न्यायपालिका के खिलाफ शिकायतों की पारदर्शिता, रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर नई बहस को जन्म दिया है।