
पीएम मोदी की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर कांग्रेस और भाजपा में आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के अंदर भी अलग-अलग राय हैं। पार्टी के कई नेता अपनी ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में पार्टी की मुश्किल बढ़ सकती है।
पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ के बाद लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने भी पार्टी लाइन से अलग अपनी बात रखी है। मनीष ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग की है।
मनीष तिवारी ने ट्वीट कर कहा ”प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर संसद में एक कानून बना है, जिसे एसपीजी एक्ट कहा जाता है। 2019 में इस एक्ट में संशोधन किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक एक संवेदनशील मामला है। इसे राजनीतिक फुटबॉल नहीं बनाना चाहिए। सही तथ्यों को सामने लाने के लिए हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से मामले की जांच करानी चाहिए।”
पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने बुधवार को कहा था कि फिरोजपुर की रैली के लिए प्रधानमंत्री को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ”आज जो हुआ, वह अस्वीकार्य है। यह पंजाबियत के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी की ”जान को खतरे की नौटंकी” का उद्देश्य राज्य में ”लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को गिराने” का है। चन्नी ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के एक सम्मानित नेता हैं, लेकिन उनके कद के नेता को इस तरह की ”घटिया नौटंकी” में शामिल होना शोभा नहीं देता।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मोदी की जान को कोई खतरा नहीं था, बल्कि फिरोजपुर में भाजपा की रैली में लोगों की संख्या कम होने के कारण उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि रैली स्थल पर खाली कुर्सियों के कारण प्रधानमंत्री “सुरक्षा खतरे के तुच्छ कारण” का हवाला देते हुए राष्ट्रीय राजधानी वापस चले गए। चन्नी ने आरोप लगाया कि जिस “झूठे बहाने” पर प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा रद्द की, वह ”पंजाब को बदनाम करने और राज्य में लोकतंत्र की हत्या करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है जैसा कि पूर्व में जम्मू कश्मीर में किया गया।”
नरेंद्र मोदी पंजाब में बुधवार को सड़क मार्ग से जाते समय ”सुरक्षा में गंभीर चूक” होने के कारण एक फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक फंसे रहे। इस घटना पर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पंजाब सरकार से इस चूक के लिए एक रिपोर्ट मांगी है और इसके लिए जिम्मेदार रहे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई को कहा है।