कहीं यही तो नहीं पूर्वांचल में रहस्यमय बुखार की वजह,जानें क्या है ‘लेप्टोस्पायरोसिस’?

रहस्यमय बुखार का प्रकोप पूर्वी यूपी में भी बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों में बेड फुल हो गए हैं। माना जा रहा है कि पूर्वांचल में बुखार की वजह लेप्टोस्पायरोसिस हो सकती है। इस बीमारी की पहचान फिरोजाबाद, मथुरा और कानपुर में हुई है, जहां बुखार से कई जानें जा चुकी हैं। यह बैक्टीरिया अमूमन चूहों व अन्य जानवरों के पेशाब में पाया जाता है।

पूर्वी यूपी में इसकी जांच अभी नहीं हो पा रही है। इस कारण बीमारी के प्रसार व मरीजों की संख्या का पता नहीं चल पा रहा है। लेकिन बाढ़ग्रस्त इलाकों में इस बीमारी के प्रसार का खतरा ज्यादा है। बहरहाल, बुखार से मौतों पर शासन संजीदा हुआ है और बीआरडी मेडिकल कॉलेज को फौरन लेप्टोस्पायरोसिस की जांच करने के निर्देश दिए हैं। बीआरडी प्रशासन ने सोमवार को इसे लेकर एक पत्र भी शासन को भेजा है, जिसमें जांच किट की मांग की गई है।

बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है लेप्टोस्पायरोसिस

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश कुमार सिंह ने बताया कि यह संक्रामक बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह बैक्टीरिया चूहे, छछूंदर, कुत्ते, गाय, बैल व भैंस में पाया जाता है। उनके मल-मूत्र के जरिए यह निकलता रहता है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। कारण, बाढ़ के पानी के साथ जानवरों का मल-मूत्र भी मिल जाता है। उसके पानी में प्रवेश करने वालों को बैक्टीरिया संक्रमित कर सकता है। यही नहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में यह बैक्टीरिया भूगर्भ जल में भी मिल जाता है। उस क्षेत्र में दूषित पानी पीने वालों को यह अपना शिकार बना लेता है।

चोट या दरार के जरिए होती है बैक्टीरिया की एंट्री

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि यह बीमारी उन क्षेत्रों में ज्यादा होती है, जहां चूहे और छछूंदर अधिक पाए जाते हैं। त्वचा पर हल्की चोट या दरार के जरिए बैक्टीरिया शरीर में एंट्री कर जाता है। इससे स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार हो जाता है।

दिल और दिमाग पर असर करता है बैक्टीरिया

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की डॉ. मीनाक्षी अवस्थी ने बताया कि यह बच्चे और बुजुर्ग दोनों को बीमार कर सकता है। यह दिल व दिमाग दोनों पर असर करता है। इसमें तेज बुखार, सिर दर्द, शरीर में दर्द, आंखें लाल होना, पीलिया, जोड़ों में दर्द, थकान, ठंड लगना, दिमागी बुखार, बहरापन व सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखते हैं। मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द के साथ शरीर में कमजोरी लगती है। अगर समय से इलाज न हो तो बीमारी गंभीर होने लगती है। किडनी और लिवर पर भी इसका असर पड़ता है। मरीज कोमा में जा सकता है।

बीआरडी में होगी जांच, किट का इंतजार

मध्य एवं पश्चिमी यूपी में लेप्टोस्पायरोसिस के मामले मिलने के बाद पूर्वांचल में भी प्रशासनिक अमला एक्शन में आ गया है। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि मामला गंभीर है। इस जांच की सुविधा गोरखपुर में होनी चाहिए थी। इस संदर्भ में बीआरडी प्रशासन से संपर्क किया जाएगा। उन्हें जांच किट मुहैया कराई जाएगी। उधर, बीआरडी प्रशासन ने भी लेप्टोस्पायरोसिस की जांच को लेकर हामी भर दी है। माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष ने बताया कि इसकी जांच की जाएगी। आवश्यक जांच किट की मांग के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जैसे ही किट उपलब्ध होगी, जांच शुरू हो जाएगी।