
नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 संसद में 1 फरवरी (रविवार) को पेश किया जाएगा, जबकि बजट से पहले की अहम दस्तावेज़ आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को प्रस्तुत किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन पेश करेंगे।
बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी 2026 से होगी और यह 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस सत्र को बुलाने की मंजूरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दे दी है। सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगी, जो बजट सत्र की परंपरागत शुरुआत मानी जाती है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों को बजट सत्र के लिए आहूत करने की स्वीकृति प्रदान की है।
बजट 2026 पर टिकी निगाहें
बजट 2026 ऐसे समय में आ रहा है जब सरकार के वित्तीय मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं। हाल ही में वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भारत की राजकोषीय स्थिति को लेकर कुछ चिंताएं जताई थीं, जिन पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सख्त प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने एक भी वर्ष ऐसा नहीं छोड़ा, जब राजकोषीय समेकन के अपने लक्ष्य से पीछे हटे हों।
हालांकि, बजट 2026 के करीब आते ही सरकार के सामने कई दबाव साफ दिख रहे हैं। आयकर में राहत और जीएसटी दरों में कटौती के बाद कर संग्रह की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। इसके साथ ही, अनुमान से कम नाममात्र जीडीपी वृद्धि और ऊंची ब्याज लागत ने भी सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ाया है।
राजकोषीय घाटा और आगे की राह
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए ₹15.7 लाख करोड़, यानी जीडीपी का 4.4% राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है। लेकिन वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों के आंकड़े संकेत देते हैं कि अंदरूनी स्तर पर दबाव बना हुआ है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सरकार कागज़ों पर घाटे का लक्ष्य हासिल कर पाती है या नहीं, बल्कि यह भी है कि महामारी के बाद के आसान सुधार दौर के खत्म होने के बाद वित्तीय स्थिरता कैसे बनाए रखी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 इस बात की परीक्षा होगा कि सरकार गैर-कर राजस्व, खर्च पर अनुशासन और यथार्थवादी अनुमानों के जरिए राजकोषीय समेकन के रास्ते पर टिके रह पाती है या नहीं। “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, हर रुपये का हिसाब इस बजट में खास मायने रखने वाला है।