
सोमवार, 9 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका-ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिससे बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली।
खबर लिखे जाने तक S&P BSE सेंसेक्स 2,272.94 अंक या 2.88% गिरकर 76,645.96 पर कारोबार कर रहा था। वहीं NSE निफ्टी50 683.30 अंक या 2.79% गिरकर 23,767.15 के स्तर पर आ गया।
तेज गिरावट के चलते BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया।
तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। सोमवार को तेल की कीमतें लगभग 25% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जो जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है।
इस उछाल की मुख्य वजह 2026 में बढ़ा ईरान-इज़राइल संघर्ष, जिसमें अमेरिका की सीधी भागीदारी से हालात और गंभीर हो गए हैं। इसके अलावा वैश्विक तेल व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने की आशंका भी बाजार को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो दुनिया भर में कई हफ्तों या महीनों तक ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट
निफ्टी50 में लगभग सभी शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। केवल ONGC और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) में मामूली तेजी देखी गई।
गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल हैं:
- एचडीएफसी बैंक – 3% से अधिक गिरावट
- आईसीआईसीआई बैंक – करीब 4.5% गिरावट
- एलएंडटी – 4.68% गिरावट
- एसबीआई – 5% से अधिक गिरावट
- रिलायंस इंडस्ट्रीज – लगभग 0.45% नीचे
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का सबसे ज्यादा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा।
- भारत पेट्रोलियम (BPCL)
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL)
इन कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में 8% से ज्यादा टूट गए। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ता है, खासकर तब जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत नहीं बढ़ाई जातीं।
अन्य शेयरों में भी तेज गिरावट
तेल की कीमतों में उछाल का असर अन्य कंपनियों पर भी दिखा।
- एशियन पेंट्स के शेयर लगभग 4.7% गिर गए।
- इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) के शेयर 7.5% से अधिक टूटे।
- मीशो के शेयर 9% से ज्यादा गिरकर ₹144.54 पर आ गए।
मीशो के शेयरों में गिरावट की वजह आयकर विभाग द्वारा करीब ₹1,499.7 करोड़ की टैक्स मांग जारी किया जाना बताया जा रहा है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली
केवल लार्जकैप ही नहीं, मिड और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी दबाव देखा गया।
- BSE मिडकैप इंडेक्स 452 अंक या 2.92% गिरकर 15,056.62 पर पहुंच गया।
- BSE स्मॉलकैप इंडेक्स 194 अंक या 3.19% गिरकर 5,909.76 पर आ गया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक जोखिम भावना कमजोर होने से विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार से लगभग 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।
हालांकि इससे पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीनों में सबसे बड़ा मासिक निवेश था।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पश्चिम एशिया का संकट गहराता है, तो निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।