
नई दिल्ली/तेहरान/तेल अवीव: ईरान और इज़रायल के बीच जारी युद्ध ने खतरनाक मोड़ ले लिया है। सोमवार (23 मार्च 2026) को ईरान ने वेस्ट एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बिजली और पानी सप्लाई करने वाले प्रतिष्ठानों पर हमले की अप्रत्यक्ष धमकी दी, जिसमें यूएई का एक परमाणु संयंत्र भी शामिल बताया जा रहा है।
यह बयान ईरान की पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से आया है, जो क्षेत्रीय तनाव के और बढ़ने का संकेत देता है।
होरमुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बीच ईरान पर दबाव बढ़ गया है कि वह होरमुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोले, अन्यथा अमेरिका बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत वहन करता है।
ईरान ने कहा है कि यह मार्ग “दुश्मन देशों” यानी अमेरिका और इज़रायल के जहाजों को छोड़कर बाकी सभी के लिए खुला रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से भारी शुल्क भी वसूल रहा है।
इज़रायल का सख्त रुख, जमीनी अभियान के संकेत
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि इज़रायल और अमेरिका अपने युद्ध लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साथ ही, इज़रायल ने लेबनान में जमीनी अभियान के संकेत दिए हैं और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
डिमोना और अराद पर मिसाइल हमले
ईरान ने इज़रायल के डिमोना और अराद शहरों पर मिसाइल हमले किए, जिसमें कम से कम 180 लोग घायल हो गए। डिमोना इज़रायल के प्रमुख परमाणु केंद्र के लिए जाना जाता है।
- अराद में 116 लोग घायल हुए, जिनमें 7 की हालत गंभीर बताई गई
- डिमोना में 64 लोग घायल हुए, कई इमारतें क्षतिग्रस्त
- घायलों में एक 10 वर्षीय बच्चा भी शामिल
इज़रायल की वायु रक्षा प्रणाली कुछ मिसाइलों को रोकने में विफल रही, जिसके कारण सीधे हमले हुए।
सऊदी अरब भी निशाने पर
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजधानी रियाद के आसपास तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इनमें से एक को इंटरसेप्ट कर लिया गया, जबकि दो निर्जन क्षेत्रों में गिरीं।
चौथे सप्ताह में पहुंचा युद्ध
28 फरवरी से शुरू हुआ यह युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। ईरान के अनुसार, अब तक अमेरिकी-इज़रायली हमलों में 1,500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं।
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होरमुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ेगा, जिससे ईंधन कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है।
मौजूदा हालात को देखते हुए यह संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है।