महिला आरक्षण कानून पर सरकार की तैयारी तेज, विशेष सत्र बुलाने की संभावना

नई दिल्ली: केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस बीच, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक आयोजित करने की मांग उठाई है।

कानून लागू होने में देरी क्यों?

महिला आरक्षण से जुड़ा कानून, जिसे संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 कहा जाता है, संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है। हालांकि, इसका क्रियान्वयन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है क्योंकि इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जो अभी लंबित है।

संशोधन के जरिए रास्ता साफ करने की कोशिश

सरकार इस कानून में बदलाव कर इसे परिसीमन से अलग करने की योजना बना रही है, ताकि आरक्षण लागू करने में और देरी न हो। पहले इस प्रस्ताव को बजट सत्र में लाने की संभावना थी, लेकिन अब इसके लिए अलग से विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।

विपक्ष ने रखी ये मांगें

विपक्षी नेताओं ने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर कहा है कि:

  • सभी दलों की बैठक जल्द बुलाई जाए
  • बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करें
  • प्रस्तावित संशोधनों की जानकारी पहले साझा की जाए
  • बैठक अप्रैल के अंत में, विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद आयोजित हो

यह पहल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से की गई और कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया।

संसद सत्र को लेकर क्या संकेत?

सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस विषय पर दो विधेयक लाने की तैयारी में है। यदि बजट सत्र में इन्हें पेश नहीं किया गया, तो इन्हें मानसून सत्र तक टाला जा सकता है या फिर विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं

महिला सांसदों ने इस पहल को सकारात्मक बताया है:

  • जेडीयू की लवली आनंद ने इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाला कदम बताया
  • भाजपा की कमलजीत सहरावत ने कहा कि यह सरकार का महत्वपूर्ण वादा पूरा करता है
  • सपा की इकरा हसन ने समर्थन के साथ लागू करने की स्पष्ट योजना की जरूरत बताई

आगे क्या?

अब इस बात का इंतजार है कि सरकार संशोधन कब और कैसे पेश करती है। यदि सभी दलों के बीच सहमति बनती है, तो महिला आरक्षण का लाभ जल्द लागू किया जा सकता है, जिससे राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी मजबूत होगी।