भारत-अमेरिका ट्रेड डील अगले सप्ताह संभव, 18% पारस्परिक टैरिफ पर सहमति: सूत्र

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अगले सप्ताह की शुरुआत में हस्ताक्षरित हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस समझौते के तहत अमेरिका पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, जबकि भारत रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा व तकनीकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताएगा।

सूत्रों ने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर के लिए अमेरिकी उच्च अधिकारी नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने कहा है कि अगले पांच दिनों में एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।

कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को ‘सुरक्षित’ रखा गया

सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत के मूल्य-संवेदनशील कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को अमेरिकी आयात से पर्याप्त रूप से सुरक्षित रखा गया है। इन क्षेत्रों में करोड़ों लोगों की आजीविका जुड़ी है, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों की।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका द्वारा कृषि और डेयरी बाजार में प्रवेश की मांग को भारत ने सख्ती से खारिज किया और इसे वार्ता से बाहर रखा।

विपक्ष ने मांगी समझौते की विस्तृत जानकारी

समझौते की घोषणा के बाद विपक्ष ने पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठाए हैं। संसद में इस मुद्दे पर हंगामा भी हुआ, जिससे Lok Sabha में मंत्री पीयूष गोयल का बयान कई बार बाधित हुआ।

विपक्ष ने यह भी पूछा है कि रूस से तेल आयात बंद करने के बाद भारत वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति कैसे सुनिश्चित करेगा। ट्रैकिंग एजेंसी के अनुसार, भारत ने 2025 में रूस से लगभग 2.1 करोड़ बैरल तेल खरीदा था।

2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस समझौते की घोषणा सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए की थी, जिसके बाद भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई।

एमएसएमई और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा

लोकसभा में अपने संक्षिप्त संबोधन में पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता घरेलू विनिर्माण, डिजाइन और एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका को निर्यात करने वाले प्रमुख देशों की तुलना में भारत पर लगने वाला टैरिफ कम होगा।

सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि 2025 में ओमान, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौतों में भी भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्र में कोई रियायत नहीं दी थी।