नक्सली बौखलाहट- में हैं। यह बौखलाहट पहले चरण के चुनाव में उनकी एक नहीं चल पाने की वजह से है। न तो चुनाव बहिष्कार की उनकी धमकी काम आई न ही वह चुनाव में खलल डाल पाए। इससे हताश नक्सली वारदात की फिराक में हैं। बिहार में पहले चरण का मतदान उन इलाकों में था, जिन्हें घोर नक्सल प्रभावित माना जाता है। पर सुरक्षाबलों की रणनीति के आगे उनकी एक नहीं चली और मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आगे नक्सली हिंसा की घटना को अंजाम देकर दहशत कामय रखने की कोशिश करेंगे। पहले चरण के मतदान से पहले नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाबल और पुलिस के जवान प्रतिनियुक्त किए गए थे। मतदान सम्पन्न होने के बाद जवानों की संख्या में कुछ कमी आएगी। ऐसे में नक्सली इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। पहाड़ और जंगलों में दुबके हथियारबंद कैडर दोबारा अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए बाहर आएंगे।
नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान पूरा होने के बाद बाहर से आए अर्द्धसैनिक बलों को दूसरे क्षेत्रों में भेजा जाएगा। हालांकि एंटी नक्सल अभियान के लिए पहले से बिहार में मौजूद अधिकतर सुरक्षाबल इलाके में ही तैनात रहेंगे। नक्सलियों की बौखलाहट को पुलिस और सुरक्षाबल भी समझ रहे हैं। लिहाजा वह मुस्तैद हैं। नक्सलियों की मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक यदि नक्सली वारदात की कोशिश करते हैं तो उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी है।