नगर निगम ने सोशल मीडिया पर दी कार्रवाई की जानकारी: अब स्ट्रीट लाइट खराब मिली तो रोज लगेगा जुर्माना?

स्ट्रीट लाइट खराब होने की 50 से 60 शिकायत रोज पहुंच रही हैं। लोगों की शिकायत का तय समय पर समाधान न होने पर निगम ने कंपनी पर जुर्माना लगाने की जानकारी सोशल मीडिया पर दी है। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, ही 75 हजार में से करीब 1300 लाइट खराब पड़ी हैं।

शाम होते ही लगने लगता है डर : शहर में शाम होते ही निकलने पर सुनसान माहौल हो जाता है क्योंकि शहर के कई मुख्य मार्गों के साथ ही आवासीय क्षेत्र में भी स्ट्रीट लाइट बंद रहती हैं। शहर की स्ट्रीट लाइट में शिकायतों की शुरुआत जनवरी 2020 से हुई, तभी कंपनी पर पहली बार बड़ा जुर्माना लगाया गया।

लोगों का कहना है कि वह कई बार निगम से अपने क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट के रात में न जलने की शिकायत कर चुके हैं, इसके बावजूद कई-कई दिनों तक मामले में अनदेखी की जाती है। इसके बाद इसे दुरुस्त किया जा रहा है।

40 फीसदी स्ट्रीट लाइट की नहीं हो रही मरम्मत

इस समस्या को लेकर गृहमंत्री अनिल विज ने पिछले साल निकायों के साथ बैठक कर समस्या के समाधान कराने नहीं करने पर कंपनी पर जुर्माना लगाने के आदेश दिए थे। शहर की सड़कों पर 75 हजार स्ट्रीट लाइट लगाकर रखरखाव का काम एक कंपनी को दस साल का मिला तो शुरुआत में काम ठीक रहा, लेकिन बाद में धीरे-धीरे काम बिगड़ता चला गया। अब नगर निगम ने भी जुर्माना लगाना शुरू कर दिया। कंपनी ने चार सालों में 75 हजार लाइट लगाए और सात हजार लगाने का काम बाकी है। काम में सुधार नहीं हो रहा है। इससे एक तरफ जहां सर्दी में हादसों का खतरा बढ़ेगा वहीं, दूसरी तरफ से इससे रात में वाहन चालकों की परेशानी बढ़ेगी।

सेक्टर की सड़कों से लेकर पार्क परिसर में नहीं जलती

सेक्टर-10ए के आरडब्ल्यूए प्रधान कमांडर उदयवीर यादव ने कहा कि सेक्टर की सड़कों से लेकर पार्क की खराब स्ट्रीट लाइट दस दिनों तक ठीक नहीं करवाई जा रही। निगम में शिकायत की जाती है तो वह कंपनी की जिम्मेदारी बता रहे हैं। ठंड बढ़ने से रात के अंधेरे में लोगों को चोरी होने का डर बना रहता है।

”संबंधित कंपनी अगर 48 घंटे में सड़कों पर खराब स्ट्रीट लाइट की मरम्मत नहीं करती है तो उस पर 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है। हर महीने 15 सौ यानी रोज 50 शिकायतें आ रही हैं। कंपनी पर 11 महीने में 17 लाख रुपये का जुर्माना किया गया है। इसे कंपनी को भुगतान की जाने वाली राशि से काटा जाएगा।”