झारखंडः सूबे में तीन साल में 166 मौत, क्यों होती है हिरासत में मौत? जानना चाहता है देश

यूपी से सांसद जगदंबिका पाल के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर में पुलिस व न्यायिक हिरासत में मौत की जानकारी राज्यवार उपलब्ध करायी है।केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में साल 2018-19 में पुलिस हिरासत में तीन, जबकि न्यायिक हिरासत में 64 मौतें हुई। वहीं 2019-20 में पुलिस हिरासत में 2 व न्यायिक हिरासत में 43, 2020-21 में पुलिस हिरासत में 5 व न्यायिक हिरासत में 49 लोगों की जान गई। वहीं इस दौरान देशभर में पुलिस हिरासत में 348 मौतें और न्यायिक हिरासत में कुल 5221 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर पुलिस हिरासत में मारे गए छह लोगों के आश्रितों को 16 लाख रुपये मुआवजा राशि दी गई है। वहीं न्यायिक हिरासत में मारे गए 24 लोगों के परिजनों को 55 लाख 75 हजार की सहायता राशि दी गई है

 झारखंड में पांच मौत इस साल हुई है। पुलिस हिरासत में मौत के लिहाज से झारखंड व पंजाब संयुक्त रूप से नौवें स्थान पर हैं। आंकड़ों के लिहाज से सर्वाधिक 26 पुलिस हिरासत में मौत के मामले में महाराष्ट्र के हैं, वहीं गुजरात में 21, जबकि बिहार में पुलिस हिरासत में मौत के 18 मामले दर्ज किए गए हैं।

गृह मंत्रालय ने लिखा है कि राज्य में पुलिस अत्याचार की वारदातों पर लगाम लगे व आमलोगों के मानवाधिकारों की रक्षा हो इसके लिए केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। साथ ही एनएचआरसी के द्वारा भी पुलिस हिरासत या न्यायिक हिरासत में मौत के मामलों की जांच के लिए गाइडलाइंस जारी किए गए हैं। इन गाइडलाइंस का पालन पुलिस को जांच के दौरान करना होता है।