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ट्रनोपिल नेशनल यूनिवर्सिटी से पिहोवा लौटे छात्र विनायक और हर्ष शर्मा ने बताई आप बीती :यूक्रेन वॉर

यूक्रेन मे अपनी पढाई को पूरा कर रहे दो छात्रों ने यूक्रेन को छोड़ते वक्त बहुत सी तकलीफो का सामना करना पड़ा उन्हें मीलो दूर पेडल च;लकर यह सफर तय करना पड़ा और माइनस 8 डिग्री तापमान का सामना करना पड़े जिसके बाद वह रोमानिया पहुंचे. हालत बहुत ही गंभीर होने के कारन बस तक नहीं मिली और उन्हें पैदल  ही यह सफर तय करना पड़ा।  उन्हें जैसे तैसे एक बस मिल जाती है। लेकिन वह उन्हें यूक्रेन बॉर्डर से पहले ही उतार देती है. फिर उसके बाद वह पेडल बॉर्डर तक पहुंचे है लेकिन यूक्रेन के सैनिक उन्हें बॉर्डर तक नहीं पहुंचने देते ,वह जैसे ही कोई भारतीय बॉर्डर पर पहुँचता अपना बॉर्डर बंद कर देते। और भारतीयों को नहीं निकलने देते. और दवाब बनाने के लिए हवाई फायर भी करते थे. उन्हें लगभग 30 घंटे लाइन मे लग्न पड़ा ,रात की बढ़ती सर्दी और बर्फ़बारी ने उन्हें बहुत डरा दिया था उसके बाद उन्हें 36घंटे होने के बाद रोमानिया का बॉर्डर पार करने को मिला फिर उन्हें वंहा भारीतय लोगो के साथ एक होटल मे ठहराया गया और खाने पिने को दिया गया. फिर उन्हें भरिया दूतावास से इंडिया वापस भेज दिया गया. लेकिन उन्हें अपने भविस्य की चिंता अभी भी सताए जा रही है. की कंही इस युद्ध की वजह से उनका खराब न हो जाये. उनकी पढाई पूरी तरह से नष्ट न हो जाये.

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