
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा फिलहाल कॉलेजियम की बैठक चल रही है। जब नामों को अंतिम रूप देने के लिए कॉलेजियम की बैठक चल रही हो तो ऐसी स्थिति में इस बारे में कुछ भी कहने का कोई कारण नहीं है।
उच्च न्यायालय ने खुलासा किया कि इस समय कॉलेजियम उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए संबंधित जजों के नामों पर विचार कर रहा है। अदातल ने इस संबंध में दायर याचिका पर 30 सितंबर को सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा फिलहाल कॉलेजियम की बैठक चल रही है। जब नामों को अंतिम रूप देने के लिए कॉलेजियम की बैठक चल रही हो तो ऐसी स्थिति में इस बारे में कुछ भी कहने का कोई कारण नहीं है। पीठ उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या से कम न्यायाधीश होने से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
दायर याचिका में कहा गया है कि न्यायाधीशों की संख्या कम होने की वजह से नागरिकों, अर्थव्यवस्था पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और लंबित मामलों का बोझ बढ़ा है। राकेश कुमार गुप्ता द्वारा दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि उच्च न्यायालय के पास पर्याप्त फिजिकल आधारभूत संरचना और कर्मचारी हैं और न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 हैं। याचिका में कहा गया है 17 अप्रैल 2013 से 31 मई, 2013 तक अधिकतम कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 42 (87.5 प्रतिशत) थी, उसके बाद यह धीरे-धीरे कम हो रही है। तीस जून 2014 से यह कभी भी 67 प्रतिशत की सीमा को पार नहीं कर पाई।
याचिका के अनुसार चार दिसंबर 2019 के बाद यह 59 प्रतिशत से नीचे और अब 50 प्रतिशत पर बनी हुई है। याचिका में कहा गया है कि न्याय में देरी का न केवल वादियों पर बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विलंबित न्याय भ्रष्टाचार और कमजोर वर्ग को न्याय से वंचित करने को बढ़ावा देता है। अंतिम नतीजा यह है कि देश का विकास धीमा हो जाता है।दिल्ली उच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, न्यायाधीशों की वर्तमान संख्या 30 है।