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पश्चिम बंगाल में एसआईआर 2026 के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी, 58 लाख नाम हटाए गए

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया के पहले चरण में राज्य के कुल 7 करोड़ 66 लाख 37 हजार 529 मतदाताओं को कवर किया गया है। इनमें से 7 करोड़ 8 लाख 16 हजार 616 मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं, जो कुल का 92.4 प्रतिशत है।

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें 24 लाख मतदाताओं को मृत, 19 लाख को स्थानांतरित, 12 लाख को लापता और करीब 1.3 लाख को डुप्लिकेट श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा 31 लाख 38 हजार 374 मतदाताओं के नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाए हैं। ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है और यह 7 फरवरी 2026 तक चलेगी।

जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं, वे फॉर्म-6 भरकर संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के पास जमा कर सकते हैं या voters.eci.gov.in वेबसाइट और ECINET ऐप के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) पश्चिम बंगाल की वेबसाइट, बीडीओ, एसडीओ, डीएम कार्यालय और जिला वेबसाइटों पर भी उपलब्ध है। राज्य की अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत राय ने 58 लाख नाम हटाए जाने को “अन्याय” करार देते हुए इसे भाजपा की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने मतदाता सहायता शिविर लगाए हैं और जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा सूची में शामिल कराने में मदद की जाएगी।

मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। हाल ही में कृष्णानगर में एक रैली के दौरान उन्होंने लोगों से अपील की थी कि अगर उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाएं तो वे इसका विरोध करें।

वहीं भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर का विरोध अवैध, फर्जी और मृत मतदाताओं को बचाने के लिए किया जा रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि फर्जी और अवैध मतदाताओं के हटने से तृणमूल की राजनीतिक जमीन कमजोर होगी।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इससे पहले एसआईआर प्रक्रिया वर्ष 2002 में हुई थी। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद आपत्तियों और सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद फरवरी 2026 में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इसके बाद ही राज्य में विधानसभा चुनावों की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।

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