Site icon Overlook

114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर जल्द फैसला संभव, मैक्रों के भारत दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय की तैयारी

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी देने की तैयारी में है। इस सौदे का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या और बढ़ती परिचालन जरूरतों को पूरा करना है।

सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) फरवरी के दूसरे सप्ताह में बैठक करने वाली है, जिसमें सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस बैठक में कुछ प्रस्तावों को ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AON) मिल सकती है, जिसके बाद मामला अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा।

प्रस्तावित योजना के तहत 114 राफेल विमानों में से अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा। बताया जा रहा है कि कुल सामग्री का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी होगा, जिससे घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगभग 18 विमान सीधे तैयार अवस्था में खरीदे जा सकते हैं, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। हालांकि इन विमानों का सोर्स कोड फ्रांस के पास ही रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सौदे को अंतिम मंजूरी मिलती है तो यह भारत के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक होगा। भारतीय वायुसेना पहले ही 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना ने पिछले वर्ष 26 नौसैनिक संस्करणों का ऑर्डर दिया था। नए विमानों के शामिल होने पर देश का कुल राफेल बेड़ा 176 तक पहुंच सकता है।

भारतीय वायुसेना इस समय लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन है। इस कमी को दूर करना रणनीतिक दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह पहले भी लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी पर चिंता जता चुके हैं।

इस बीच, फ्रांसीसी राष्ट्रपति का भारत दौरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिखर सम्मेलन भी दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

Exit mobile version