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ईरान में सत्ता प्रदर्शन: खामेनेई सरकार ने लाखों समर्थकों को सड़कों पर उतारा, विरोध प्रदर्शनों का जवाब

तेहरान: देशभर में भड़के सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के कुछ ही दिनों बाद ईरान में सत्ता पक्ष ने ताकत का प्रदर्शन करते हुए बड़े पैमाने पर समर्थक रैलियां आयोजित कीं। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में लाखों की संख्या में सरकार समर्थक लोग सड़कों पर उतरे और इस्लामिक गणराज्य के समर्थन में नारे लगाए।

सोमवार को मध्य तेहरान के एंगेलाब (क्रांति) चौक पर हजारों लोग एकत्र हुए। सरकारी टीवी फुटेज में देखा गया कि लोग ईरानी झंडे लहराते हुए सुरक्षा बलों के उन सदस्यों को श्रद्धांजलि दे रहे थे, जिनकी हालिया अशांति के दौरान मौत हुई। सरकार ने इन घटनाओं को “दंगे” करार दिया है।

राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की अपील के बाद तेहरान के अलावा अन्य शहरों में भी इसी तरह की रैलियां निकाली गईं।

सरकार समर्थक रैलियों का मकसद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन रैलियों का उद्देश्य हालिया नागरिक प्रदर्शनों के बाद यह दिखाना था कि सत्ता प्रतिष्ठान के पास अब भी मजबूत जनसमर्थन है। प्रदर्शनकारियों ने देश की संप्रभुता और इस्लामिक गणराज्य के समर्थन में नारे लगाए।

वहीं, विदेशों में स्थित मानवाधिकार और कार्यकर्ता समूहों का दावा है कि प्रदर्शनों के दौरान जहां दर्जनों सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई, वहीं सैकड़ों या उससे अधिक प्रदर्शनकारी भी कार्रवाई में मारे गए। ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

ईरान में विरोध प्रदर्शन क्यों भड़के?

ईरान में 28 दिसंबर से सरकार-विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जब ईरानी रियाल में भारी गिरावट आई और महंगाई तेजी से बढ़ी। रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतों में उछाल से आम लोगों पर सीधा असर पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शन जल्द ही देशभर में फैल गए।

इन प्रदर्शनों ने जल्द ही राजनीतिक रूप ले लिया और भीड़ ने सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार को हटाने की मांग शुरू कर दी। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर आगजनी की और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

ट्रंप की चेतावनी और बातचीत के संकेत

इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि ईरानी नेतृत्व ने संभावित सैन्य कार्रवाई की उनकी चेतावनियों के बाद बातचीत के लिए संपर्क किया है। ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शन जारी रहने के बीच मृतकों की संख्या 500 के पार पहुंच चुकी है।

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “ईरान के नेताओं ने फोन किया है… एक बैठक तय की जा रही है। वे बातचीत चाहते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि “बैठक से पहले भी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।”

ईरान का रुख: बातचीत को तैयार, युद्ध के लिए भी तैयार

सोमवार, 12 जनवरी को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान आपसी सम्मान के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी भी रखता है।

तेहरान में विदेशी राजदूतों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा, “इस्लामिक गणराज्य ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। हम बातचीत के लिए भी तैयार हैं, बशर्ते वह समान अधिकारों और आपसी सम्मान पर आधारित हो।”

हालात पर अंतरराष्ट्रीय नजर

ईरान में सरकार समर्थक रैलियों और जारी विरोध प्रदर्शनों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जहां एक ओर सत्ता प्रतिष्ठान अपनी ताकत दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष ने देश को लंबे तनाव के दौर में धकेल दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार आंदोलन को किस तरह संभालती है और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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