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आसाराम को राहत नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने की पैरोल याचिका खारिज

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में जेल की सजा काट रहे आसाराम को फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में ही रहना पड़ेगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को आसाराम के भांजे द्वारा लगाई गई पेरोल याचिका खारिज कर दी। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता और जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद आसाराम की पैरोल पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

हालांकि आसाराम के वकीलों के अनुरोध पर दोबारा जिला पैरोल कमेटी के समक्ष आवेदन करने की छूट दी है। रमेश भाई की ओर से याचिका में कहा गया था कि आसाराम को जेल में पांच साल से भी ज्यादा हो गए हैं और उसका आचरण भी संतोषजनक है। चौथाई सजा पूरी करने के बाद प्रथम पेरोल आसाराम का अधिकार है।

सरकार द्वारा पेश जवाब में कहा गया था कि प्रथम पेरोल आसाराम का हक है, लेकिन मृत्यु तक जेल में रहने की सजा भुगत रहे आसाराम के बाकी प्राकृतिक जीवन की गणना नहीं की जा सकती। इस कारण पांच साल की जेल को चौथाई सजा काटना नहीं कहा जा सकता।

आसाराम तीन अन्य प्रकरणों में भी वांछित है। राज्य सरकार द्वारा मांगी गई विधिक राय में महानिदेशक कारागार ने आसाराम को पेरोल देने से मना कर दिया है। इससे पहले में जिला पेरोल कमेटी द्वारा आसाराम के लिए मांगी गई बीस दिन की पैरोल अर्जी को खारिज कर दिया गया था।

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